अमर शहीद ठाकुर झूरी सिंह, एक योद्धा जिसने अंग्रेजों को नाकों चने चबवाए और उन्हे कायर साबित कर दिया था


हमारा देश भारत अनन्य वीर योद्धाओं की वीरगाथा से भरा हुआ है। ऐसे वीर जिन्हे लगभग सब जानते हैं और बहुत से ऐसे जिन्हें हम नहीं जानते या जिनकी साहस और शौर्य गाथा कभी हम तक पहुंच ही नहीं पाई। पर जिनके शौर्य को कभी भुलाया नहीं जा सकता। ऐसे ही एक वीर शहीद ठाकुर झूरी सिंह की शौर्य गाथा हम आपके समक्ष लाए हैं।

यह शौर्य गाथा उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के ग्राम परऊपुर के परम वीर शहीद झूरी सिंह की है जिन्होने सन् 1857 के क्रांति के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में अपने शौर्य का परचम फहराया। उन्होने अंग्रेजों के खिलाफ जो लड़ाइ छेड़ी थी उसका इतना प्रभाव था कि भदोही क्षेत्र में पैर रखते हुए अंग्रेजों के पैर कांपते थे। अंग्रेजों ने उन्हे पकड़ने और मारने की तमाम कोशिशें की पर कुछ भी काम ना आया। शहीद झूरी सिंह के शौर्य के आगे उनकी तमाम कोशिशें फीकी पड़ जाती थीं

उन्होने क्षेत्र में ना सिर्फ अंग्रेजों के प्रभाव को बढने से रोका था, बल्कि उन्हे इतना नुकसान पहुंचाया था कि अंग्रेज किसी भी कीमत पर उन्हे रोकना चाहते थे, और वे समझ गए थे कि शहीद झूरी सिंह के रहते क्षेत्र में वो अपना वर्चस्व स्थापित नहीं कर सकते थे। अतः अंग्रेजों ने शहीद झूरी सिंह के खिलाफ अपना सर्वस्व दांव पर लगा दिया। पर शहीद झूरी सिंह के कथन अनुसार, कि जब तक उनके हाथ में उनकी तलवार रहेगी, कोई उन्हे कोई हरा नहीं सकता, अंग्रेज उन्हे छू तक नहीं पाए और वो हर तरह से अंग्रेजों को क्षति पहुंचाते रहे। जिसे देख कर क्षेत्र के लोगों को भी अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा होने की हिम्मत मिली।

शहीद झूरी सिंह स्मारक, परऊपर

शहीद झूरी सिंह के पराक्रम ने अंग्रेजों को इतना परेशान कर दिया था कि वो कायराना हरकत पर उतर आए और उन्हे धोखे से मारने का प्लान बनाया। और अंततः एक गद्दार की मुखबिरी की वजह से अंग्रेजों ने, शहीद झूरी सिंह को उनके भोजन के समय, जब वे निहत्थे थे, धोखे से उनकी हत्या कर दी। किंतु आज भी उनके पराक्रम को ग्राम परऊपुर के लोगों ने संजोए रखा है। उत्तर प्रदेश सरकार और लोगों के सहयोग से उनका स्मारक बनाया गया है और उनके पराक्रम की गाथा आज भी क्षेत्र के बच्चे बच्चे की जुबान पर है।

शहीद झूरी सिंह मार्ग, परऊपुर , ज्ञानपुर

नमन है उस परम वीर योद्धा के पराक्रम और शौर्य को जिसने देश और समाज की रक्षा के लिए अकेले ही एक युद्ध छेड़ा और लड़ा। उनकी यादें अनंत काल तक रहेंगी।

लेखक : शैलेश सिंह

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One thought on “अमर शहीद ठाकुर झूरी सिंह, एक योद्धा जिसने अंग्रेजों को नाकों चने चबवाए और उन्हे कायर साबित कर दिया था”

  • डॉ रामेश्वर सिंह प्रपौत्र शहीद झूरी सिंह

    बहुत सुंदर

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