जानिए आखिरकार पुरूष, महिलाओं की तुलना में कम भावुक क्यों होते हैं


एक शोध के निष्कर्ष से पता चला है कि महिलाओं की तुलना में पुरूष कम भावुक होते हैं। अगर इस शोध को दरकिनार करें तो भी आपने और हमने इस बात को अक्सर ही अनुभवित किया है। पुरूष अपनी भावनाओं को ज्यादातर दबा लेते हैं और कठोरता का प्रदर्शन करते हैं। क्या आपने कभी इस रहस्य को समझने की कोशिश की है कि आखिर ऐसा क्यों? चलिए आज हम इस रहस्य से पर्दा उठाते हैं।

पुरूषों की ये कठोरता उन्हें एक कठोर ट्रेनिंग से मिलती है। अब आप सोच रहे होंगे कैसी ट्रेनिंग, हमने तो कोई ट्रेनिंग नहीं ली। पर ये ट्रेनिंग तो हमें बचपन से ही मिलनी शुरू हो जाती है, हमारे आस-पास के लोगों से, परिवार से, समाज से और यहां तक कि हमारे दोस्तों से। ‘तू लड़का (मर्द) है, और लड़के कभी रोते नहीं, लड़का होकर लड़कियों की तरह क्यों रो रहा है, लड़कियों जैसा इतना भावुक क्यों हो रहा है, और मर्द को कभी दर्द नहीं होता ‘ ये सारे डायलाग इसी ट्रेनिंग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

जब कोई लड़का रोता है तो बचपन से ही उसे कुछ इस तरह के डायलाग सुनने को मिल जाते हैं।  और ये डायलाग पुरूषों को ताउम्र सुनने को मिलता है। अब चूंकि इस तरह की सीख बचपन से ही मिलने लगती है, जिसमें कि माता-पिता का भी रोल होता है तो वयस्क होने तक लड़कों का दिल और दिमाग सख्त होने लगता है।

जो पुरूष सख्त नहीं भी होते हैं वे दर्द और रूदन जैसी भावनाओं को इसलिए दबा लेते हैं कि दोस्त क्या कहेंगे, आस-पास के लोग क्या कहेंगे?

इस लेख का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना कतई नहीं है। यदि इससे किसी के भी भावनाओं को किसी तरह की ठेस पहुंचती है तो हम उसके लिए क्षमा प्रार्थी हैं।

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